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।। कविता ।। खुशिसं झुमि उठ्ल जनकपुरधाम

starkhabar mukesh9801061609
५ वर्ष अगाडि
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राकेश कुमार झा(रसिक), (जनकपुरधाम ) जनक कएलनि विश्वामित्रके प्रणाम ।। जनक जी कहलनि हमरालेल कि आदेश , मुनि बजलाह, विवाह भेल सम्पन्न शिव धनुष तोड्लनि राम ।। खुशिसं झुमि उठ्ल जनकपुरधाम ।। सभकिछु तैयारी कएल जाए , अयोध्यासं दशरथ बजाओल जाए , हर्षित भेल सभ सभागन । शिव धनुष तोड्लनि राम ।। खुशिसं झुमि उठ्ल जनकपुरधाम ।। सभक भेल पुलकीत मन । दोसर दिन वरात चलल । दशरथ आ वशिष्ठ जनकपुर अएलाह । राम लक्ष्मन कएलनि प्रणाम ।। खुशिसं झुमि उठ्ल जनकपुरधाम ।। गुरु वशिष्ठके चरण छुलनि । भरत शत्रुधन सेहो छलाह । सभकियो भेटक भेलाह प्रशन्न । दशरथक चारु पुत्रक नाम ।। खुशिसं झुमि उठ्ल जनकपुरधाम ।। लगनक दिन वो अघहन महिना छल । सभ मिलिक मंगल गित गवैत छल । जय जयकार भरहल छल प्रभुके नाम ।। खुशिसं झुमि उठ्ल जनकपुरधाम ।। मांडवीक विवाह भेल भरत सं , उर्मिला सं लक्ष्मणक । श्रुतिकीर्तिके शत्रुधनसं । विवाह सभक भेल सम्पन्न । फुलक वर्षा भरहल छल । शिव धनुष तोड्लनि राम ।। खुशिसं झुमि उठ्ल जनकपुरधाम ।। ब्रह्मा,विष्ण आ शिव वनिगेला ब्राह्मन । जनक आ सुनयना धोने छलैथ रामक चरण । जनक जी कएलनि कन्यादान , सभकियो दए रहल छल आर्शिवाद । शिव धनुष तोड्लनि राम ।। खुशिसं झुमि उठ्ल जनकपुरधाम ।।